ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी है कि किसी भी नए हमले का "तुरंत, प्रभावी और बिना भौगोलिक सीमा" वाला जवाब दिया जाएगा। दूसरी तरफ कतर की राजधानी दोहा में चली कई दिनों की बातचीत बिना किसी बड़ी सफलता के खत्म हो गई, हालांकि ईरान का कहना है कि संपर्क अब भी जारी है।
सैन्य कमांडरों से मुलाकात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम अकाउंट पर जारी बयान में शीर्ष सैन्य कमांडरों को निर्देश दिया कि दुश्मन की "हर तरह की संपत्तियों" को लक्ष्य सूची में शामिल किया जाए। बताया गया है कि मार्च में पद संभालने के बाद सेना प्रमुखों के साथ उनकी यह पहली रिपोर्ट की गई बैठक थी। उन्होंने खाड़ी तट, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में ऊंची तैयारी रखने को कहा।
दोहा में क्या हुआ?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने लगातार तीन दिन कतर के मध्यस्थों से बातचीत की। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जज़ीरा से कहा कि कतर के साथ बनी सहमति के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की समय-सीमा पांच दिन से घटाकर दो दिन करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। शर्त यह है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए, फ्रीज़ की गई संपत्तियां लौटाए और तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट दे।
अराघची ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पत्र को "सकारात्मक कदम" बताया, लेकिन यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिकी अधिकारियों से सीधी मुलाकात की ज़रूरत नहीं है। सोमवार को रॉयटर्स ने बताया कि वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुई, पर दोनों देशों के बीच संपर्क बने हुए हैं।
अमेरिका का रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए हमलों पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है। क्षेत्र के देशों को आशंका है कि मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद हालात बदल सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता है। यहां रुकावट का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीज़ल और भारत के आयात बिल पर पड़ता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी इससे जुड़ी है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन, खासकर अमेरिकी चुनाव के बाद का समय, बेहद अहम माने जा रहे हैं।